56 गांवों का फूटा गुस्सा, परियोजना पर सवाल
56 गांवों का फूटा गुस्सा, परियोजना पर सवाल
दंतेवाड़ा। बहुचर्चित बोधघाट विद्युत एवं सिंचाई परियोजना का विरोध एक बार फिर तेज हो गया है। परियोजना के सर्वे कार्य को रोकने की मांग को लेकर बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों के 56 गांवों के ग्रामीणों ने परिचर्चा का आयोजन किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सरपंच, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण शामिल हुए।
बोधघाट परियोजना संघर्ष समिति के नेतृत्व में आयोजित परिचर्चा में ग्रामीणों ने परियोजना से संभावित विस्थापन, जल-जंगल-जमीन पर पड़ने वाले प्रभाव और आजीविका के संकट को लेकर चिंता जताई। वक्ताओं ने कहा कि प्रभावित गांवों की सहमति के बिना किसी भी प्रकार का सर्वे कार्य स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मांगे नहीं मानीं तो आंदोलन करेंगे तेज
परिचर्चा के बाद संघर्ष समिति के प्रतिनिधियों, सरपंचों और ग्रामीणों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए बोधघाट परियोजना के सर्वे कार्य को तत्काल रोकने की मांग की। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
सहमति के बाद ही करें काम
संघर्ष समिति का कहना है कि परियोजना से हजारों ग्रामीणों के विस्थापन और पारंपरिक संसाधनों पर असर पड़ने की आशंका है। इसलिए सरकार पहले प्रभावित गांवों से संवाद स्थापित करे और उनकी सहमति के बाद ही आगे की कार्रवाई करे।
1985 से कर रहे विरोध
अखिल भारतीय आदिवासी महासभा के संभागीय अध्यक्ष कोवासी बोमड़ा ने ग्रामीणों के विरोध का समर्थन करते कहा है कि 1985 से महासभा इस परियोजना का विरोध कर रही है। परियोजना से लोग अपने पुश्तैनी घर, जमीन और आजीविका के साधनों से वंचित हो जाएंगे ।








