जमीन निगल गई या आसमान? 16 भैंसों का सुराग नहीं

जमीन निगल गई या आसमान? 16 भैंसों का सुराग नहीं

जमीन निगल गई या आसमान? 16 भैंसों का सुराग नहीं

बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में खेती-किसानी का सीजन शुरू होते ही किसानों के सामने संकट खड़ा हो गया है। बालोद थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम खैरथाडीह से एक-दो नहीं, बल्कि कुल 16 भैंसें (8 जोड़ी) रहस्यमयी परिस्थितियों में एक साथ लापता हो गई हैं। इस अप्रत्याशित घटना के बाद से पूरे गांव में हड़कंप मच गया है। कृषि कार्य और अपनी आजीविका के मुख्य सहारे इन मवेशियों के अचानक गायब होने से पीड़ित किसान चिंता में हैं। कई दिनों की सघन खोजबीन के बाद भी कोई सुराग न मिलने से अब पशुओं की सामूहिक चोरी होने की आशंका जताई जा रही है।

50-50 किलोमीटर तक खाक छानी

गांव के पशुपालकों की भैंसें रोज की तरह चराई के लिए बाहर निकली थीं, लेकिन शाम ढलने के बाद भी वे घर वापस नहीं लौटीं। शुरुआत में किसानों ने अपने स्तर पर पास के चरागाहों और मैदानों में तलाश की, परंतु जब उनका कहीं पता नहीं चला तो पूरा गांव एकजुट होकर खोजबीन में जुट गया। ग्रामीणों ने आसपास के सभी नालों, तालाबों, जंगलों और दईहान क्षेत्रों को छान मारा। इतना ही नहीं, किसानों की टोलियों ने गांव से चारों दिशाओं में करीब 50-50 किलोमीटर दूर तक जाकर खाक छानी, लेकिन उन्हें लगातार निराशा ही हाथ लगी।


कृषि कार्यों में है निर्भरता

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब मानसून के आगमन के साथ ही जिले में खेती-किसानी की गतिविधियां रफ्तार पकड़ चुकी हैं। खेतों की जुताई, बखरनी और बोआई जैसे कृषि कार्यों के लिए ग्रामीण इलाकों में किसान आंशिक रूप से भैंसों पर निर्भर हैं। ग्रामीण तामेश्वर सिंघारे और पीड़ित किसान नारद राम विश्वकर्मा ने बताया कि 17 जून (बुधवार) की रात से ही मवेशी गायब हैं। किसानों का कहना है कि मवेशी उनके हाथ-पैर की तरह होते हैं और बोआई के ठीक पहले इनका खोना किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है।

थाने में शिकायत पर एफआईआर नहीं हुई

ग्रामीणों ने इस मामले की लिखित शिकायत बालोद थाने में दी है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने अब तक मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं की है और न ही जांच शुरू की है। फिलहाल, अपनी आजीविका वापस पाने की आस में पूरे गांव की निगाहें अब पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।