पानी-पानी को तरसा पाकिस्तान, सिंध-बलूचिस्तान बेहाल
पानी-पानी को तरसा पाकिस्तान, सिंध-बलूचिस्तान बेहाल
नई दिल्ली। पाकिस्तान प्रायोजित पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा दशकों पुरानी 'सिंधु जल संधि' को रोके जाने से पाकिस्तान गहरे जल संकट में घिर गया है। नई दिल्ली के इस कूटनीतिक कदम के बाद सिंध और बलूचिस्तान के कृषि क्षेत्रों में आर्थिक तबाही का खतरा मंडरा रहा है।
यह संकट पाकिस्तान की लगभग एक-तिहाई आबादी को प्रभावित कर रहा है। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते, और मानवता के दुश्मनों तक सिंधु का पानी नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
नहरें सूखीं, सिंध को भारी नुकसान
पाकिस्तानी अखबार 'डॉन' के अनुसार, पाकिस्तान की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ माना जाने वाला सुक्कुर बैराज सिस्टम पानी की भारी किल्लत से जूझ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, सिंध की प्रमुख नहरों में पानी का स्तर चिंताजनक रूप से गिर गया है, जहां दादू नहर में 82%, नॉर्थ वेस्ट नहर में 64.1% और राइस नहर में 38% की भारी कमी दर्ज की गई है।
पंजाब पर पानी चोरी के आरोप
इस संकट के बीच पाकिस्तान के भीतर ही राजनीतिक और क्षेत्रीय विवाद गहरा गया है। सिंध के सिंचाई विभाग का आरोप है कि पंजाब प्रांत अपने तय हिस्से (44,000 क्यूसेक) से 21% अधिक यानी 53,394 क्यूसेक पानी ले रहा है। इसी तरह टौंसा बैराज में भी निर्धारित कोटे से अधिक पानी रोका जा रहा है, जिससे निचले इलाकों सिंध और बलूचिस्तान तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है।







