न्यूक्लियर मुद्दों पर अभी अधूरी है अमेरिका-ईरान डील

न्यूक्लियर मुद्दों पर अभी अधूरी है अमेरिका-ईरान डील

न्यूक्लियर मुद्दों पर अभी अधूरी है अमेरिका-ईरान डील

नई दिल्ली । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ शांति समझौते को “पूरा” बताए जाने के बावजूद दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील मुद्दा यानी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। सामने आए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के मसौदे से संकेत मिल रहे हैं कि परमाणु गतिविधियों से जुड़े कई अहम विषय अभी भी अनसुलझे हैं और इन पर आगे अलग से बातचीत की जाएगी।

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया समझौते को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि परमाणु कार्यक्रम पर ठोस सहमति के बिना इस डील को पूरी तरह सफल नहीं माना जा सकता।

ट्रंप ने डील को बताया अंतिम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर घोषणा की थी कि ईरान के साथ समझौता अब पूरा हो चुका है। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंध हटाने का भी एलान किया था।

ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह माना जाने लगा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा टकराव अब समाप्ति की ओर है। हालांकि बाद में सामने आए समझौता मसौदे ने कई नए सवाल खड़े कर दिए।
परमाणु कार्यक्रम पर अब भी अस्पष्टता

रिपोर्ट्स के अनुसार मेमोरेंडम में ईरान ने दोबारा यह वादा जरूर किया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा, लेकिन दस्तावेज में यूरेनियम संवर्धन की सीमा को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।
14 सूत्रीय शांति समझौते को समझें

मेहर न्यूज एजेंसी के अनुसार, मेमोरैंडम के ड्राफ्ट में कई प्रावधान शामिल किए गए हैं-

    30 दिनों के अंदर नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह खत्म करना।
    ईरान के आस-पास के इलाकों से अमेरिकी सेना को हटाना।
    लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई को तुरंत और हमेशा के लिए खत्म करना।
    ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल न देने और ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने का अमेरिका का वादा।
    30 दिनों के अंदर ईरान की व्यवस्था के तहत होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना।
    ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल उत्पादों और उनसे जुड़े एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियों को रोकना।
    एनर्जी एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई तक ईरान की पूरी पहुंच।
    ईरान के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण प्लान पेश करने का अमेरिका और उसके सहयोगियों का वादा।
    संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव के जरिए अंतिम समझौते को मंजूरी देना।
    परमाणु मुद्दों और पाबंदियों में बड़ी राहत पर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए 60 दिनों का बातचीत का समय।
    परमाणु हथियार न बनाने के लिए 'परमाणु अप्रसार संधि' (Nuclear Non-Proliferation Treaty) के तहत ईरान का फिर से वादा।
    इस इलाके में सैन्य तैनाती न बढ़ाने और बातचीत के दौरान नई पाबंदियां न लगाने का अमेरिका का वादा।
    बातचीत के दौरान ईरान की फ्रीज की गई 24 अरब डॉलर की संपत्ति को जारी करना, जिसमें से आधी रकम बातचीत शुरू होने से पहले जारी की जाएगी।
    समझौते के लागू होने की निगरानी के लिए एक निगरानी तंत्र बनाना।

इसके अलावा ईरान की परमाणु सुविधाओं को समाप्त करने, मौजूदा परमाणु ढांचे में बदलाव या अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण तंत्र को लेकर भी कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। यही वजह है कि समझौते के बावजूद परमाणु कार्यक्रम का सबसे विवादित हिस्सा अभी भी अधूरा माना जा रहा है।
आगे 60 दिन तक चलेगी अलग बातचीत

खबरों के मुताबिक इस मेमोरेंडम को लागू किए जाने के बाद अगले 60 दिनों तक अलग वार्ता प्रक्रिया चलाई जाएगी। इसी दौरान परमाणु संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत और आर्थिक पुनर्निर्माण जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भविष्य की बातचीत का दायरा भी सीमित रखा गया है। ईरान के अनुसार चर्चा केवल संवर्धित परमाणु सामग्री, संवर्धन गतिविधियों, आर्थिक पुनर्निर्माण और प्रतिबंधों में राहत तक सीमित रहेगी।
मिसाइल कार्यक्रम एजेंडे से बाहर

समझौते के मसौदे में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को उसके समर्थन को चर्चा के एजेंडे से बाहर रखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार यही वे मुद्दे हैं जिन्हें लेकर अमेरिका और पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान पर दबाव बनाते रहे हैं। ऐसे में इन विषयों को औपचारिक बातचीत से बाहर रखना भविष्य में नए विवाद की वजह बन सकता है।
ईरान ने रखीं सख्त शर्तें

ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काजम गरीबाबादी ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि अंतिम समझौते पर बातचीत तभी शुरू होगी, जब तेहरान यह पुष्टि कर देगा कि वॉशिंगटन ने अपने शुरुआती वादे पूरे कर दिए हैं।

ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार तेहरान ने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। इनमें फ्रीज किए गए एसेट्स को जारी करना, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देना और समुद्री पाबंदियों को हटाना शामिल है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका इन शर्तों को लागू नहीं करता, तब तक किसी विस्तृत समझौते पर आगे नहीं बढ़ा जाएगा।
अभी आधिकारिक दस्तावेज का इंतजार

सामने आए मसौदे में दुश्मनी समाप्त करने का व्यापक फ्रेमवर्क बताया गया है, लेकिन दोनों सरकारों ने अभी तक समझौते का पूरा आधिकारिक पाठ सार्वजनिक नहीं किया है।

कई अहम जानकारियां अभी भी सत्यापित नहीं हुई हैं। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब आगामी बैठकों और आधिकारिक घोषणाओं पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 60 दिन अमेरिका और ईरान संबंधों की दिशा तय करने में बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।