बस्तर के चार बच्चों का सपना साकार, पहले राउंड में MBBS सीट

बस्तर के चार बच्चों का सपना साकार, पहले राउंड में MBBS सीट

बस्तर के चार बच्चों का सपना साकार, पहले राउंड में MBBS सीट

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत है तो उन्हें सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की। बस्तर जिला प्रशासन की इसी सोच के तहत संचालित निःशुल्क ज्ञानगुड़ी कोचिंग संस्थान अब शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव की मिसाल बनकर सामने आया है। संस्थान के चार विद्यार्थियों ने नीट काउंसलिंग के पहले ही राउंड में शासकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीट हासिल कर बस्तर का नाम रोशन किया है।

ज्ञानगुड़ी के सफल विद्यार्थियों में समीर मरकाम और गीतेश्वरी सलाम का चयन शासकीय मेडिकल कॉलेज डिमरापाल, जगदलपुर में हुआ है। वहीं कुमारी कृष्णा सेन को कांकेर मेडिकल कॉलेज और खुशबू बिस्वास को पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर में एमबीबीएस में प्रवेश मिला है। पहले ही काउंसलिंग राउंड में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीट मिलना विद्यार्थियों की मेहनत और संस्थान की प्रभावी तैयारी को दर्शाता है।

90 में से 50 विद्यार्थियों ने क्वालीफाई किया नीट

ज्ञानगुड़ी की सफलता केवल चार विद्यार्थियों के एमबीबीएस चयन तक सीमित नहीं है। संस्थान में अध्ययनरत 90 विद्यार्थियों में से 50 ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की है। इनमें चार विद्यार्थियों को पहले ही चरण में एमबीबीएस की सीट मिली। यह उपलब्धि बताती है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण कोचिंग, अध्ययन सामग्री और निरंतर मार्गदर्शन मिले तो वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं।

कलेक्टर ने सफल विद्यार्थियों को दिए टैबलेट

नीट में सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थी कलेक्ट्रेट पहुंचकर बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा से मिले। विद्यार्थियों ने अपनी सफलता का श्रेय जिला प्रशासन के सहयोग और कलेक्टर के मार्गदर्शन को दिया। कलेक्टर ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए डिजिटल अध्ययन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सफल विद्यार्थियों को टैबलेट भेंट किए। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों की मेहनत की भी सराहना की।

पढ़ाई की रणनीति पर मिला पिन प्वाइंट मार्गदर्शन

सफल विद्यार्थियों के मुताबिक, पूरे वर्ष कलेक्टर छिकारा द्वारा ज्ञानगुड़ी में दिए गए अध्ययन संबंधी पिन प्वाइंट सुझाव उनकी तैयारी में काफी उपयोगी रहे। समय प्रबंधन, विषयवार तैयारी, नियमित अभ्यास और परीक्षा के अनुरूप रणनीति बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर और अन्य अधिकारी भी लगातार केंद्र का दौरा कर विद्यार्थियों से संवाद करते रहे और उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के व्यावहारिक अनुभवों से प्रेरित किया।

बस्तर में अवसरों की नई राह खोल रही ज्ञानगुड़ी

ज्ञानगुड़ी की सफलता यह संदेश देती है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सही मार्गदर्शन जिला स्तर तक पहुंचाया जाए तो दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थी भी डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य प्रतिष्ठित पेशेवर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं। स्थानीय स्तर पर बेहतर शैक्षणिक माहौल मिलने से प्रतिभाओं को पलायन से रोकने और उन्हें भविष्य में अपने क्षेत्र के विकास से जोड़ने की संभावनाएं भी मजबूत होती हैं।