गठन के बाद 12 केस CBI को, लेकिन इंसाफ अधूरा
गठन के बाद 12 केस CBI को, लेकिन इंसाफ अधूरा
रायपुर। राज्य गठन के बाद कई हाई प्रोफाइल आपराधिक, भ्रष्टाचार और राजनीतिक मामलों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई, लेकिन अधिकांश मामलों का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अब तक सामने नहीं आ सका है। कुछ मामलों में आरोप पत्र दाखिल हुए, कुछ में प्रभावशाली लोगों से पूछताछ और गिरफ्तारियां हुईं, जबकि कई मामलों में अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हो सके।
अब कोरिया जिले के चर्चित तिहरे हत्याकांड की जांच भी सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एक बार फिर एजेंसी की कार्यप्रणाली और उसके परिणामों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जोगी के कार्यकाल में ब्लैक सी, व जग्गी हत्याकांड
राज्य गठन के बाद अजीत जोगी सरकार के कार्यकाल में सबसे पहले 'ब्लैक सी' जाली नोट प्रकरण और रामअवतार जग्गी हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जग्गी हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद मामला हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
बाद के मामले में अंतिम परिणाम लंबित
इसी तरह कलर डापलर घोटाला, ताड़मेटला-मोरपल्ली और सुकमा के आदिवासी गांवों में 2011 की आगजनी, अश्लील सीडी कांड, झीरम कांड, महादेव एप, सीजीपीएससी घोटाला, पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड और पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड समेत करीब 12 मामलों में जांच का अंतिम परिणाम अब तक सामने नहीं आ सका है।
पत्रकार हत्याकांड की भी जांच
वर्ष 2020 में बिलासपुर के पत्रकार सुशील पाठक हत्याकांड और वर्ष 2011 में गरियाबंद जिले के पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड समेत कलर डापलर घोटाला, ताड़मेटला-मोरपल्ली आगजनी, कथित अश्लील सीडी कांड और झीरम कांड जैसे संवेदनशील मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। इनमें कलर डापलर घोटाले में आरोप पत्र दाखिल हुआ, लेकिन अंतिम दोषसिद्धि नहीं हो सकी। वहीं, अश्लील सीडी मामले में विशेष अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बरी कर दिया। हालांकि, सीबीआई की अपील के बाद मामला पुनः न्यायिक प्रक्रिया में विचाराधीन है।
सामान्य सहमति बहाल होते ही सीबीआई के पास पहुंचे कई बड़े मामले
वर्ष 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा सीबीआई की सामान्य सहमति (जनरल कंसेंट) वापस लेने के कारण एजेंसी नए मामलों की सीधे जांच नहीं कर पा रही थी। वर्ष 2024 में भाजपा सरकार बनने के बाद यह सहमति बहाल की गई, जिसके बाद सीजीपीएससी भर्ती घोटाला, महादेव आनलाइन सट्टा एप, बिरनपुर हिंसा और दिव्यांग कल्याण फंड गबन जैसे चर्चित मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
सीजीपीएससी में गिरफ्तारियां, महादेव की जांच जारी
सीजीपीएससी भर्ती घोटाले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और चयनित अभ्यर्थियों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं तथा आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। वहीं, महादेव आनलाइन सट्टा एप और दिव्यांग कल्याण फंड गबन मामलों में सीबीआई की जांच अभी जारी है।
बीएल अग्रवाल रिश्वत कांड: सीबीआई के आरोप अदालत में नहीं टिके छत्तीसगढ़ कैडर के 1998 बैच के वरिष्ठ आइएएस अधिकारी बीएल अग्रवाल से जुड़े चर्चित रिश्वत कांड में सीबीआई को अदालत में सफलता नहीं मिली। वर्ष 2017 में एजेंसी ने आरोप लगाया था कि अग्रवाल ने अपने खिलाफ चल रही सीबीआई जांच को प्रभावित करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये की रिश्वत देने की साजिश रची थी। हालांकि, गिरफ्तारी और आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद अभियोजन अदालत में अपने आरोप सिद्ध नहीं कर सका।
अब तिहरे हत्याकांड की जांच पर टिकी निगाह
कोरिया जिले के नौगई (कटगोड़ी) तिहरे हत्याकांड की जांच अब सीबीआई करेगी। राज्य सरकार ने 30 जून को इसके लिए अनुमति दे दी है। भाजपा नेता भरत सिंह गहरवार उर्फ लल्ला और उनके दो साथियों की हत्या कर शवों को वाहन सहित जलाने के मामले में पुलिस सभी नौ आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। अब इस मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की जिम्मेदारी सीबीआई के पास होगी, जिससे पीड़ित परिवारों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।








