सांसद बने, पर मिट्टी से नाता नहीं टूटा

सांसद बने, पर मिट्टी से नाता नहीं टूटा

सांसद बने, पर मिट्टी से नाता नहीं टूटा

जगदलपुर। आज के दौर में जहां राजनीति और वीआईपी संस्कृति जनप्रतिनिधियों को आम जनता और जमीन से दूर कर देती है, वहीं छत्तीसगढ़ के बस्तर संसदीय क्षेत्र से सुखद तस्वीर सामने आई है। बस्तर के सांसद महेश कश्यप ने पद और प्रतिष्ठा होने के बावजूद वे आज भी दिल से एक किसान ही हैं। मानसून की पहली फुहार के साथ, जब पूरे देश के किसान अपने खेतों की ओर रुख कर रहे हैं, सांसद कश्यप भी अपने खेतों में हल जोतते, बुवाई और रोपाई करते देखे गए।

सांसद महेश कश्यप का कृषि से जुड़ाव उनकी पीढ़ियों की विरासत है। उनके पूर्वज कृषि कार्य में लगे रहे हैं और उन्होंने इस परंपरा को सांसद बनने के बाद भी जीवंत रखा है। जब अन्य जनप्रतिनिधि अपने व्यस्त कार्यक्रमों और प्रोटोकॉल में उलझे रहते हैं, तब महेश कश्यप अपने परिवार के साथ खेतों में पसीना बहाते नजर आते हैं। वे स्वयं फसलों की कटाई से लेकर रोपाई तक के कार्य में हाथ बंटाते हैं।

किसानी मूल आधार, मिट्टी से जुड़ाव ही असली ताकत

सांसद कश्यप ने कहा कि किसानी उनका मूल आधार है और मिट्टी से उनका जुड़ाव ही उनकी असली ताकत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजनीतिक पद आते-जाते रहते हैं, लेकिन जो हमारा पुश्तैनी और मूल काम है, उसे कभी नहीं भूलना चाहिए। उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता बस्तर का चौमुखी विकास और यहाँ के किसानों की खुशहाली सुनिश्चित करना है।

नागरिकों में बना चर्चा का केंद्र

सांसद की इस सादगीपूर्ण जीवनशैली ने स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया है। बस्तर के नागरिकों के बीच उनका यह व्यवहार चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है। लोगों का कहना है कि अपने सांसद को एक आम किसान की तरह खेतों में काम करते देखना गर्व की बात है।