मध्यप्रदेश में रीजनल सिनेमा को नई पहचान देगी ‘थारो मारो प्रेम’

मध्यप्रदेश में रीजनल सिनेमा को नई पहचान देगी ‘थारो मारो प्रेम’

मध्यप्रदेश में रीजनल सिनेमा को नई पहचान देगी ‘थारो मारो प्रेम’

मुंबई । भारतीय सिनेमा इन दिनों नए दौर में प्रवेश कर चुका है। अब दर्शक सिर्फ बड़े बजट और चमकदार स्टारकास्ट तक सीमित नहीं रह गए, बल्कि अपनी मिट्टी से जुड़ी कहानियों को भी उतना ही प्यार मिल रहा है। यही वजह है कि रीजनल सिनेमा तेजी से देशभर में नई पहचान बना रहा है।

इसी बदलते सिनेमाई दौर में मालवा की संस्कृति और मध्यप्रदेश की बोलियों को बड़े पर्दे पर नए अंदाज़ में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं मालवा टॉकीज़ के फाउंडर और फिल्म डायरेक्टर-प्रोड्यूसर राजेंद्र राठौर।

पिछले डेढ़ दशक से मुंबई में सक्रिय राजेंद्र राठौर अब मालवी, निमाड़ी, बुंदेली और बघेली जैसी बोलियों को बड़े सिनेमाई कैनवास पर नई पहचान दिलाने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि मध्यप्रदेश की मिट्टी में कहानियों की कोई कमी नहीं, बस उन्हें नए दौर के दर्शकों तक दमदार अंदाज़ में पहुँचाने की जरूरत है।

'थारो मारो प्रेम' को लेकर बढ़ा एक्साइटमेंट

राजेंद्र राठौर इन दिनों अपनी अपकमिंग मालवी फिल्म 'थारो मारो प्रेम' को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। मालवा की पहली रोमांटिक फिल्म मानी जा रही यह फिल्म सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि मालवा की मिट्टी, उसकी बोली और स्थानीय रंग को बड़े पर्दे पर नए अंदाज़ में पेश करने की तैयारी है।

फिल्म की शूटिंग उज्जैन, इंदौर, महेश्वर, मांडू और मालवा क्षेत्र के कई खूबसूरत लोकेशंस पर किए जाने की योजना है। खास बात यह है कि फिल्म में मालवा की लोकसंस्कृति, संगीत और संवादों को पूरी तरह ऑर्गेनिक अंदाज़ में दिखाया जाएगा, ताकि दर्शकों को पर्दे पर मालवा का असली रंग महसूस हो सके।
'कुँवारापुर' से लेकर वेब सीरीज़ तक दिखाया अलग विज़न

'थारो मारो प्रेम' से पहले राजेंद्र राठौर 'कुँवारापुर' जैसी रीजनल फिल्म को डायरेक्ट और प्रोड्यूस कर चुके हैं, जिसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और इसके लिए उन्हें बेस्ट फिल्म डायरेक्टर का खिताब भी मिला।

वहीं, 'शादी में हंगामा' जैसी वेब सीरीज़ के जरिए भी उन्होंने रीजनल स्टोरीज़ को नए दौर के दर्शकों तक पहुँचाने की कोशिश की, जो कि दर्शकों ने खूब पसंद की। लगातार रीजनल कंटेंट पर काम कर रहे राजेंद्र राठौर अब मालवा सिनेमा को नए दौर की पहचान दिलाने की तैयारी में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
कैमरे के पीछे भी दिखेगा मालवा का टैलेंट

राजेंद्र राठौर सिर्फ फिल्मों की कहानियों तक सीमित सोच नहीं रखते। वे चाहते हैं कि रीजनल सिनेमा में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ कैमरा, एडिटिंग, ररईटिंग, संगीत, डबिंग और तकनीक से जुड़े युवाओं को भी बड़े स्तर पर अवसर मिलें।

उनका मानना है कि जब अपनी मिट्टी के लोग ही अपनी कहानियों को पर्दे पर उतारते हैं, तभी उस सिनेमा की असली आत्मा दर्शकों तक पहुँचती है। यही वजह है कि वे मध्यप्रदेश में रीजनल सिनेमा का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।
विज्ञापन फिल्मों की दुनिया में भी बना चुके हैं अलग पहचान

राजेंद्र राठौर अब तक 50 से अधिक विज्ञापन फिल्मों को डायरेक्ट और प्रोड्यूस कर चुके हैं। उनके प्रोजेक्ट्स में सोनू सूद, हेमा मालिनी, भाग्यश्री और उर्वशी रौतेला जैसे कलाकार भी काम कर चुके हैं। विजुअल स्टोरीटेलिंग और बड़े सिनेमाई प्रेजेंटेशन को लेकर उनकी अलग समझ ही उन्हें क्षेत्रीय सिनेमा में भी एक अलग पहचान दिला रही है।
अब सम्राट विक्रमादित्य की कहानी बड़े पर्दे पर

    राजेंद्र राठौर उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित एक एआई फिल्म पर भी काम कर रहे हैं। वर्तमान में, इस प्रोजेक्ट का लेखन कार्य जारी है और इसे बड़े सिनेमाई स्तर पर तैयार करने की योजना बनाई जा रही है।

उनका मानना है कि वर्षों तक सम्राट विक्रमादित्य की छवि को सिर्फ 'विक्रम-बेताल' की कहानियों तक सीमित कर दिया गया, जबकि उनका वास्तविक व्यक्तित्व उससे कहीं ज्यादा विशाल, दूरदर्शी और प्रेरणादायक रहा है।
वे इस फिल्म के जरिए सम्राट विक्रमादित्य के न्याय, संस्कृति और भारतीय इतिहास में उनके योगदान को नए अंदाज़ में दर्शकों तक पहुँचाना चाहते हैं।
फिल्म में विक्रम संवत और उज्जैन की ऐतिहासिक विरासत को भी खास तौर पर दिखाए जाने की तैयारी है।
राजेंद्र राठौर मानते हैं कि आधुनिक तकनीक और एआई विजुअल्स के जरिए यदि भारतीय इतिहास को बड़े पर्दे पर भव्य रूप में प्रस्तुत किया जाए, तो नई पीढ़ी उससे कहीं ज्यादा गहराई से जुड़ सकती है।