पाकिस्तान तक पहुंचा ‘कॉकरोच आंदोलन’, सोशल मीडिया पर छिड़ी नई जंग
पाकिस्तान तक पहुंचा ‘कॉकरोच आंदोलन’, सोशल मीडिया पर छिड़ी नई जंग
नई दिल्ली । भारत के इंटरनेट स्पेस में एक तीखे विद्रोही व्यंग्य (Satire) के रूप में शुरू हुआ 'कॉकरोच आंदोलन' अब सरहद पार कर पाकिस्तान तक पहुंच गया है। पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों में ऐसे दर्जनों अकाउंट्स और पेज सामने आए हैं, जो भारत की वर्चुअल 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की तर्ज पर बनाए गए हैं। 16 मई 2026 को लॉन्च होने के महज एक हफ्ते के भीतर इस डिजिटल आंदोलन ने दोनों देशों के युवाओं के बीच सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है।
वर्तमान में पाकिस्तान के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' के कई स्थानीय संस्करण वायरल हो रहे हैं, जिनमें 'कॉकरोच अवामी पार्टी', 'कॉकरोच अवामी लीग' और 'मुत्तहिदा कॉकरोच मूवमेंट' प्रमुख हैं। इनमें से 'कॉकरोच अवामी पार्टी' ने अपने आधिकारिक बायो में लिखा है: "युवाओं का, युवाओं द्वारा और पाकिस्तान के लिए एक नया डिजिटल राजनीतिक मोर्चा।"
"जिन्हें सिस्टम ने समझा कॉकरोच, हम उनकी आवाज हैं"
पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स पर सक्रिय इन वर्चुअल पार्टियों के बायो में छिपे दर्द और आक्रोश को बयां करते हुए लिखा गया है, "जिन्हें मौजूदा राजनीतिक सिस्टम ने कॉकरोच और कीड़ा-मकौड़ा समझा, हम उन्हीं मजलूमों की असली आवाज हैं।" दिलचस्प बात यह है कि इस पाकिस्तानी आंदोलन का मुख्य लोगो (Logo) भारत की मूल 'कॉकरोच जनता पार्टी' से काफी मिलता-जुलता है, लेकिन इसे पाकिस्तानी ध्वज के सम्मान में हरे और सफेद रंग में ढाला गया है। इन डिजिटल पैरोडी अकाउंट्स ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ' (PTI), नवाज शरीफ की 'PML-N' और बिलावल भुट्टो की 'PPP' जैसे पारंपरिक रसूखदार राजनीतिक दलों के विरूद्ध एक समानांतर वैचारिक युद्ध छेड़ दिया है।
घोषणापत्र और वेबसाइट के साथ 'कीड़ों' का डिजिटल विद्रोह
यह आंदोलन महज कुछ मीम्स (Memes) तक सीमित नहीं है। भारत में 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने बकायदा अपनी एक आधिकारिक वेबसाइट और एक बागी घोषणापत्र (Manifesto) भी लाइव किया है, जिससे प्रेरित होकर पाकिस्तानी युवाओं ने भी अपने देश के सिस्टम, बेरोजगारी, और महंगाई के खिलाफ इसे एक डिजिटल टूल बना लिया है।
अभिजीत दिपके के इस अनूठे आइडिया ने यह साबित कर दिया है कि सत्ता प्रतिष्ठानों और व्यवस्थाओं के खिलाफ युवाओं का असंतोष और व्यंग्य किसी सरहद का मोहताज नहीं होता। दोनों ही देशों में जो युवा खुद को बेरोजगारी और सिस्टम की बेरुखी के कारण 'परजीवी' या 'कॉकरोच' जैसा उपेक्षित महसूस कर रहे थे, वे अब इस डिजिटल कबीले का हिस्सा बनकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।







