Satluj’ पर हरभजन-ओनिर का रिव्यू, भारत में फिल्म बैन
Satluj’ पर हरभजन-ओनिर का रिव्यू, भारत में फिल्म बैन
मुंबई । दिलजीत दोसांझ (Diljit Dosanjh) की चर्चित फिल्म 'पंजाब 95', जिसे बाद में 'सतलुज' नाम से रिलीज किया गया, एक बार फिर सुर्खियों (Satluj Movie Controversy) में है। हाल ही में यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज हुई थी, लेकिन भारत में रिलीज के महज 48 घंटे के भीतर इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया और गूगल पर दिलजीत दोसांझ और 'सतलुज' ट्रेंड करने लगे।
फिल्म को हटाए जाने से पहले कई दर्शकों और फिल्मी हस्तियों ने इसे देख लिया था। सोशल मीडिया पर फिल्म की चर्चा तेज रही और कई सेलेब्स ने इसकी कहानी, अभिनय और विषयवस्तु की खुलकर सराहना की।
हरभजन सिंह ने फिल्म और जसवंत सिंह खालरा की कहानी को सराहा
पूर्व भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फिल्म को लेकर लंबी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने लिखा कि जलियांवाला बाग हत्याकांड इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था, लेकिन जसवंत सिंह खालरा की कहानी देखने के बाद उनके मन में यह सवाल उठा कि जब अपने ही लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले लोग भय का कारण बन जाएं, तो वह पीड़ा और भी गहरी होती है।
हरभजन सिंह ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी का कर्तव्य निर्दोष लोगों की रक्षा करना है, न कि अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना। उन्होंने लिखा कि जसवंत सिंह खालरा की हिम्मत ने लोगों के कथित गुमशुदा होने और गुपचुप अंतिम संस्कार जैसे मामलों को उजागर किया। उन्होंने फिल्म के जरिए इस कहानी को दुनिया तक पहुंचाने के लिए निर्देशक हनी त्रेहान और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की सराहना की। साथ ही उन्होंने उल्लेख किया कि फिल्म को IMDb पर 9.7 की रेटिंग मिली है।
निर्देशक ओनिर ने बताया प्रभावशाली फिल्म
फिल्म निर्देशक ओनिर ने इंस्टाग्राम पर 'सतलुज' का ट्रेलर साझा करते हुए इसे बेहद प्रभावशाली फिल्म बताया। उन्होंने लिखा कि यह फिल्म केवल पंजाब के कठिन दौर या सत्ता के दुरुपयोग की कहानी नहीं कहती, बल्कि दर्शकों को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघनों और आम नागरिकों की बेबसी पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
ओनिर के अनुसार फिल्म में उठाया गया सवाल "आतंकवादी कौन है?" आज भी बेहद प्रासंगिक है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म साहस, भरोसे और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने का संदेश देती है।
कलाकारों के अभिनय की जमकर तारीफ
ओनिर ने अपने पोस्ट में फिल्म के कलाकारों की भी सराहना की। उन्होंने लिखा कि दिलजीत दोसांझ ने अपने अभिनय से किरदार को जीवंत बना दिया है। वहीं गीतिका विद्या ओहल्यान, कंवलजीत सिंह और सुविंदर विक्की के अभिनय को भी उन्होंने प्रभावशाली बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि निर्देशक हनी त्रेहान ने पंजाब की कहानी को बेहद संवेदनशील और ईमानदार तरीके से प्रस्तुत किया है। ओनिर ने Zee5 की ओर से फिल्म का अनकट संस्करण रिलीज करने की भी सराहना की।
भारत में क्यों नहीं देखी जा सकती सतलुज?
सतलुज का पहले नाम पंजाब 95 (Punjab 95) रखा गया था। फिल्म की कहानी मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है, जिन्होंने 80-90 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के दौर में हजारों अज्ञात शवों के कथित तौर पर गैर-कानूनी रूप से अंतिम संस्कार किए जाने का मामला उजागर किया था। खालरा ने ऐसे सबूत जुटाए थे जिनसे पता चलता था कि पुलिस ने बिना संबंधित परिवारों को बताए बिना चुपचाप उन शवों का अंतिम संस्कार किया था।
खालरा का अपहरण और हत्या
खालरा की जांच ने पंजाब के सबसे अशांत दौर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा। 1995 में खालरा का अपहरण कर लिया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। बाद में उनके अपहरण और हत्या के मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया।
नाम बदलने से लेकर रिलीज तक विवादों में रही फिल्म
यह फिल्म लंबे समय से सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और सुझाए गए कट्स को लेकर चर्चा में रही। शुरुआत में इसका नाम 'पंजाब 95' था, जिसे बाद में बदलकर 'सतलुज' कर दिया गया। रिलीज से पहले फिल्म को लेकर कई बार विवाद सामने आए और इसकी रिलीज भी कई अवसरों पर टली।
फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की, जगजीत संधू और गीतिका विद्या ओहल्यान अहम भूमिकाओं में नजर आए हैं। भारत में जी5 से फिल्म हटाए जाने के बाद एक बार फिर इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है।








