25 मौतों पर सदन में सियासी संग्राम, 17 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव
25 मौतों पर सदन में सियासी संग्राम, 17 जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा मानसून सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। सत्र के अंतिम दिन 17 जुलाई को इस पर चर्चा की जाएगी। सदन में सक्ती के वेदांता प्लांट हादसे में 25 लोगों की मौत का मामला प्रश्नकाल में गूंजा। अनिल अग्रवाल की गिरफ्तारी और जांच को लेकर विपक्ष ने सरकार से तीखे सवाल किए। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने सदन में हंगामा किया और बाद में वॉकआउट कर दिया।
सत्र के दौरान अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा, ‘माननीय नेता जी, अविश्वास प्रस्ताव भी दे दिए हो और प्रश्न भी पूछ रहे हैं।’ इस पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने जवाब दिया, ‘अरे यार, आप हमेशा गड़बड़ करते हो… लगता है, दिनभर चढ़ी रहती है आपको। अविश्वास प्रस्ताव किस कारण ला रहे हैं, ये अभी बताने तो दो।’
वहीं, सदन में रायपुर की जलापूर्ति, अमृत मिशन और जल जीवन मिशन को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। रायपुर शहर में पेयजल संकट, टैंकरों से सप्लाई, अधूरी योजनाओं और अवैध नल कनेक्शनों को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक और सवाल-जवाब देखने को मिले।
किसानों के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव, विपक्षी विधायक निलंबित
खरीफ सीजन में किसानों को खाद, उन्नत बीज और बिजली की समस्या को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरा। विपक्ष ने डीएपी, पोटाश और खाद की कमी, कालाबाजारी तथा किसानों की परेशानियों का मुद्दा उठाया।
कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध होने का दावा किया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में हंगामा किया, गर्भगृह में पहुंचा और नियमों के तहत विपक्षी विधायक स्वतः निलंबित हो गए।
राज्य गठन के बाद 10वां अविश्वास प्रस्ताव
सदन में आज नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। राज्य गठन के बाद यह विधानसभा में लाया जाने वाला यह 10वां अविश्वास प्रस्ताव है। इससे पहले 9 बार सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जा चुके हैं, लेकिन हर बार संबंधित सरकारें सदन में अपना बहुमत साबित करने में सफल रहीं। आज (मंगलवार) सदन में आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही विधानसभा अध्यक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए दिन तय करेंगे।
अविश्वास प्रस्ताव क्यों अहम?
अविश्वास प्रस्ताव का मकसद केवल सरकार गिराना नहीं होता। विपक्ष इस बहस के जरिए सरकार के पूरे कार्यकाल के कामकाज पर सवाल उठाता है। सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियां गिनाता है और विपक्ष के आरोपों का जवाब देता है। चर्चा के बाद मतदान होता है। यदि सरकार के पक्ष में बहुमत रहता है तो प्रस्ताव स्वत: गिर जाता है।
इस बार कांग्रेस नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और विभिन्न प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं भाजपा सरकार अपनी योजनाओं, विकास कार्यों और प्रशासनिक उपलब्धियों का पक्ष रखेगी।
विधानसभा में बीजेपी के 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 सदस्य हैं। 1 विधायक गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के हैं। ऐसे में संख्या बल बीजेपी के पक्ष में है। यही वजह है कि प्रस्ताव का राजनीतिक महत्व अधिक है, जबकि गणित सरकार के पक्ष में दिखाई देता है।
अब तक का रिकॉर्ड भी सरकार के पक्ष में
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इतिहास में अब तक 9 बार अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा हो चुकी है। हर बार सरकार बहुमत साबित करने में सफल रही है। पहली विधानसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ 2002 और 2003 में भाजपा ने दो बार अविश्वास प्रस्ताव लाया था।
इसके बाद डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ 2007, 2011, 2015, 2017 और 2018 में कुल पांच बार कांग्रेस ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। वहीं, भूपेश बघेल सरकार के खिलाफ 2022 और 2023 में भाजपा अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई। इन सभी प्रस्तावों पर लंबी बहस हुई, लेकिन कोई भी पारित नहीं हो सका।
भूपेश बघेल (कांग्रेस) की पूर्ववर्ती सरकार के खिलाफ छत्तीसगढ़ विधानसभा में जुलाई 2023 के मानसून सत्र के दौरान मुख्य विपक्षी दल बीजेपी की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। विपक्ष ने सरकार के खिलाफ 109 बिंदुओं का आरोप-पत्र पेश किया था। हालांकि, भारी बहुमत (कांग्रेस के 72 विधायक) के कारण यह प्रस्ताव विधानसभा में ध्वनिमत से गिर गया था
सबसे लंबी चर्चा जुलाई 2015 में डॉ. रमन सिंह सरकार के खिलाफ आए अविश्वास प्रस्ताव पर हुई थी, जो 24 घंटे 25 मिनट तक चली थी। मंगलवार को विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ पेश होने वाला अविश्वास प्रस्ताव राज्य गठन के बाद 10वां होगा।








