"छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की मजदूरी तीन गुनी करने की तैयारी"
"छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की मजदूरी तीन गुनी करने की तैयारी"
रायपुर। राज्य की जेलों में काम करने वाले सजायाफ्ता कैदियों को जल्द ही पहले से कहीं अधिक पारिश्रमिक मिल सकता है। जेल मुख्यालय ने मौजूदा मजदूरी व्यवस्था में बदलाव करते हुए कुशल, अकुशल और नई अर्धकुशल श्रेणी के आधार पर दैनिक पारिश्रमिक बढ़ाने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा है।
प्रस्ताव के अनुसार कुशल कैदियों को 225 रुपये, अकुशल को 200 रुपये और अर्धकुशल कैदियों को 150 रुपये प्रतिदिन मजदूरी देने का प्रविधान किया गया है। इससे प्रदेश की 33 जेलों में बंद करीब सात हजार सजायाफ्ता कैदियों को लाभ मिलेगा।
अभी कुशल को 70 व अकुशल को 60 रुपये प्रतिदिन
वर्तमान में जेलों में कार्य करने वाले कुशल कैदियों को 70 रुपये और अकुशल कैदियों को 60 रुपये प्रतिदिन पारिश्रमिक दिया जाता है। लंबे समय से इस राशि में संशोधन नहीं होने के कारण इसे बढ़ाने की मांग उठ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए जेल मुख्यालय ने नई पारिश्रमिक व्यवस्था का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा है।
अर्धकुशल श्रेणी भी लाने का प्रस्ताव
प्रस्ताव में पहली बार अर्धकुशल श्रेणी को भी शामिल किया गया है, जिससे विभिन्न प्रकार के कार्य करने वाले कैदियों को उनकी दक्षता के अनुरूप भुगतान किया जा सकेगा। साथ ही इससे कैदियों में कौशल विकास और उत्पादक कार्यों के प्रति रुचि बढ़ेगी तथा जेलों में संचालित विभिन्न उत्पादन इकाइयों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
छूटने पर मिलेगी सम्मानजनक राशि
जेल मुख्यालय के अधिकारियों ने बताया कि प्रस्ताव का उद्देश्य केवल मजदूरी बढ़ाना नहीं, बल्कि कैदियों के पुनर्वास को भी मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि जेल से रिहा होने के बाद कैदियों के पास सम्मानजनक राशि उपलब्ध रहेगी, जिससे वे सामान्य जीवन की शुरुआत करने में सक्षम होंगे। इससे उनमें आत्मनिर्भर बनने की भावना भी विकसित होगी। प्रस्ताव को शासन की मंजूरी मिलने के बाद नई पारिश्रमिक दरें लागू की जाएंगी।
मिलेगा आर्थिक संबल
बढ़ी हुई मजदूरी से कैदियों को आर्थिक संबल मिलेगा और सुधारात्मक व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी, जिससे जेलों में कौशल आधारित कार्यों को बढ़ावा देने के प्रयास और प्रभावी होंगे।
-हिमांशु गुप्ता,महानिदेशक जेल। (फोटो-हिमांशु गुप्ता)








