'जीरो शॉर्टेज' के दावे के बीच 35 हजार क्विंटल धान का खेल
'जीरो शॉर्टेज' के दावे के बीच 35 हजार क्विंटल धान का खेल
धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में धान खरीदी को लेकर एक ऐसा 'अंधेर' सामने आया है, जिसने सहकारिता विभाग और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के 100 खरीदी केंद्रों में लगभग 35 हजार क्विंटल धान सूखत (शॉर्टेज) के नाम पर गायब हो गया, जिसकी बाजार कीमत करीब 11 करोड़ रुपये आंकी गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि जिसे विभाग ने पहले वास्तविक नुकसान माना था, उसे अब शासन-प्रशासन के दबाव में 'शून्य' दिखा दिया गया है।
समस्या की जड़ जिले में धान उठाव की सुस्त रफ्तार में थी। मई और जून की भीषण गर्मी के बीच धान के उठाव पर लगी रोक और मिलरों की सुस्ती के चलते केंद्रों में जमा धान तेजी से सूखने लगा। जिला नोडल अधिकारी कार्यालय ने भी शुरुआत में इसे स्वीकार किया था और 35 हजार क्विंटल धान की सूखत सार्वजनिक की गई थी। यह नुकसान जिले की उन समितियों पर भारी पड़ा, जिनकी जिम्मेदारी पर यह धान रखा गया था।
प्रशासनिक दबाव और 'जुगाड़' से हुई भरपाई
सूत्रों के अनुसार, जब नुकसान का आंकड़ा 11 करोड़ तक पहुंचा, तो प्रशासन ने समितियों पर इसे 'जीरो शॉर्टेज' में बदलने का भारी दबाव बनाया। अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में इस चुनौती को स्वीकार किया और आनन-फानन में इस कमी को पूरा करने का खेल शुरू हुआ। जिला नोडल अधिकारी बीपी गोस्वामी ने स्पष्ट किया कि केंद्रों में आई 35 हजार क्विंटल सूखत की भरपाई 'सीपेज धान' (रिसाव या पुराना धान) का उपयोग करके की गई है। इसी हेरफेर के बाद जिले में धान की सूखत का प्रतिशत शून्य दिखाया गया है।
लग रहे लीपापोती के आरोप
फिलहाल, इस पूरे मामले में 'लीपापोती' के गंभीर आरोप लग रहे हैं। किसान और जानकार मांग कर रहे हैं कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराए ताकि यह पता चल सके कि 11 करोड़ के नुकसान को आखिर किन परिस्थितियों में शून्य किया गया और इसके पीछे किसका हाथ है।








